वेतन संकट से जूझ रहे जलापूर्ति कर्मी, हड़ताल हुई तो 10 पंचायतों में गहराएगा पेयजल संकट


बोकारो जिले के बालीडीह गरगा डैम परिसर स्थित हैसाबातू बहु पंचायत ग्रामीण जलापूर्ति योजना से जुड़े पंप ऑपरेटरों और अन्य कर्मचारियों को पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है। ऐसे में वे अगर हड़ताल में चले गए तो इस भीषण गर्मी में 10 पंचायत के लाखों लोगों को पेयजल नहीं मिल पाएगा। इसी संकट को देखते हुए कई पंचायत के मुखिया और मुखिया प्रतिनिधियों ने मिलकर निर्णय लिया कि इसके लिए आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है जिन पंचायतों में यहां से पेयजल की आपूर्ति होती है, उन पंचायतों के सभी गांव ड्राई जोन में आते हैं. ऐसे में महासंकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

टेंडर की अवधि समाप्त होने से उत्पन्न हुई यह स्थिति 

कर्मचारियों ने बताया कि कई बार संबंधित विभाग से गुहार लगाने के बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। हसन इमाम और वीरेंद्र कुमार समेत अन्य कर्मियों के अनुसार, इस योजना में करीब 9 कर्मचारी पिछले पांच वर्षों से कार्यरत हैं। योजना का संचालन जिस ठेकेदार के माध्यम से हो रहा था, उसका टेंडर समाप्त हो चुका है, जिसके बाद ठेकेदार वेतन देने से इंकार कर रहा है। वहीं विभाग भुगतान की जिम्मेदारी ठेकेदार पर डाल रहा है। इस खींचतान के बीच कर्मचारियों की स्थिति दयनीय होती जा रही है।

वेतन में भी नहीं हुई बढ़ोतरी 

गोड़ाबाली उत्तरी पंचायत के मुखिया बालेश्वर सिंह राठौर ने कहा कि यहां के कर्मियों को अब तक सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही है। योजना की शुरुआत के समय 5 से 7 हजार रुपये मासिक वेतन तय किया गया था और समय के साथ वृद्धि का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन आज तक वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्द समाधान नहीं निकला, तो मजबूर होकर वे काम बंद कर देंगे। इससे करीब 80 हजार से अधिक लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। बांसगोड़ा पूर्वी के पूर्व मुखिया मनोज मुर्मू ने कहा कि इस योजना से गोड़ाबाली उत्तरी-दक्षिणी, माराफारी, नरकरा, हैसाबातू पूर्वी-पश्चिमी, बांसगोड़ा पूर्वी-पश्चिमी, रीतूडीह, सतनपुर समेत कई पंचायतों के लाखों लोगों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत है।

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