रेलवे स्टेशन पर बाल तस्करी का पर्दाफाश, RPF और चाइल्डलाइन ने 11 मासूमों को बचाया


बोकारो रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और चाइल्डलाइन की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मानव तस्करी का शिकार होने से 11 नाबालिग बच्चों को बचा लिया है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन कल देर रात हटिया-पटना एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या: 18623) में चलाया गया। बचाए गए सभी बच्चों की उम्र 12 से 17 वर्ष के बीच है, जिन्हें पटना बिहार  के होटलों में बाल मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था। हालांकि, अंधेरे और भीड़ का फायदा उठाकर बाल तस्करी गिरोह का मुख्य सरगना मौके से फरार होने में कामयाब रहा। रेस्क्यू किए गए सभी 11 बच्चों को आरपीएफ द्वारा बाल कल्याण समिति (CWC) बोकारो के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के निर्देशानुसार, बच्चों को सुरक्षित रूप से बाल गृह (चास) सौंप दिया गया है। फिलहाल बाल गृह में बच्चों को उचित माहौल देकर उनसे पूछताछ की जा रही है और उनकी काउंसलिंग की जा रही है ताकि गिरोह के नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

​बच्चों को अपना निशाना बना रहे मानव तस्करी गिरोह 

​इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में आरपीएफ की ओर से किरण उरांव, लक्ष्मी कुमारी और राजेश कुमार के साथ-साथ चाइल्डलाइन से अरुण कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई। इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए सहयोगिनी संस्था के समन्वयक तथा 'जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन' के कार्यकर्ता रवि कुमार राय ने कहा कि विभिन्न ट्रेनों के जरिए अंतर्राज्यीय मानव तस्करी गिरोह लगातार बच्चों को अपना निशाना बना रहे हैं। हालांकि रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी द्वारा सघन जांच अभियान चलाया जाता है, लेकिन बच्चों को बाल तस्करी और बाल दुर्व्यवहार में धकेलने वाले इन गिरोहों पर त्वरित और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की सख्त जरूरत है। उन्होंने आगे बताया कि इस गंभीर समस्या को देखते हुए सहयोगिनी संस्था द्वारा पूरे बोकारो जिले में बाल तस्करी और बाल मजदूरी के खिलाफ व्यापक रूप से सघन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके।

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