दृश्यकला प्रतियोगिता में डीपीएस बोकारो के विद्यार्थियों ने बिखेरी रचनात्मक प्रतिभा


कैनवास पर उतरते जीवंत रंग, उंगलियों के स्पर्श से आकार लेती गीली मिट्टी और चेहरों पर उकेरी गई अहिंसा व शांति की मर्मस्पर्शी छवियां। कुछ ऐसा ही अभूतपूर्व और प्रेरक दृश्य शुक्रवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), बोकारो में देखने को मिला। अवसर था अंतर-सदन दृश्यकला प्रतियोगिता का। इसमें विद्यालय के सभी छह सदनों के 250 से अधिक बाल कलाकारों ने अपनी कल्पनाशीलता, रचनात्मकता और सामाजिक चेतना का ऐसा समागम प्रस्तुत किया कि देखने वाले भावविभोर हो उठे। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य बच्चों में न केवल कलात्मक कौशल को निखारना था, बल्कि वैश्विक शांति, सर्वधर्म समभाव, पर्यावरण संकट और नशामुक्त समाज जैसे संवेदनशील व ज्वलंत मुद्दों के प्रति गहरी मानवीय संवेदना जगाना भी था। विद्यालय परिसर में आयोजित इस बहुआयामी स्पर्धा में कक्षा छठी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रासंगिक विषयों पर कलाकृतियां बनाने का अवसर दिया गया। ऑन द स्पॉट पेंटिंग स्पर्धा में जूनियर वर्ग ने व्हेन नेचर सफर्स, ह्यूमैनिटी सफर्स विषय पर ब्रश की स्ट्रोक्स से उकेरा कि वनों का विनाश किस प्रकार मानवता के विनाश का कारण बन रहा है, वहीं सीनियर वर्ग ने देयर इज नो प्लैनेट बी थीम पर चित्रकारी कर यह कड़ा संदेश दिया कि यदि हमने समय रहते पृथ्वी को नहीं बचाया, तो हमारा कोई अस्तित्व नहीं रहेगा। इसी प्रकार, पोस्टर मेकिंग में जूनियर ग्रुप के विद्यार्थियों ने स्टॉप ड्रग्स विषय पर प्रभावकारी पोस्टर बनाकर युवाओं को नशे की गर्दिश से दूर रहने की अपील की, जबकि सीनियर ग्रुप ने रिलीजन फॉर लव, नॉट वार थीम के माध्यम से सर्वधर्म समभाव और विश्व शांति का सर्वकालिक संदेश दिया।

भारत की सांस्कृतिक विविधता और अखंडता का सुंदर ताना-बाना उकेरा गया 

दूसरी ओर, फेस पेंटिंग प्रतियोगिता में चेहरों को कैनवास बनाकर जूनियर वर्ग ने फेस पेंटिंग में शांति की अनूठी परिभाषाएं गढ़ीं, तो सीनियर वर्ग ने  माइथोलॉजी एंड फैंटेसी थीम पर भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और पौराणिक चरित्रों की मनमोहक झांकी उतारी। इसी प्रकार, रंगोली स्पर्धा में जमीन पर सूखे रंगों से जूनियर विंग ने विद्यालय की 40 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा को प्रदर्शित किया, तो सीनियर कैटेगरी के बच्चों ने माय कंट्री, माय पीपल विषय पर भारत की सांस्कृतिक विविधता और अखंडता का सुंदर ताना-बाना उकेरा। क्ले मॉडलिंग में जूनियर वर्ग ने एंटीक स्टडी के तहत प्राचीन कलाकृतियों को मिट्टी से आकार दिया, तो सीनियर वर्ग ने एक्वेरियम विषय पर जलीय जीवों के संरक्षण को जीवंत रूप दिया। इसके अलावा कैलीग्राफी प्रतियोगिता में भी बच्चों ने सुंदर अक्षरों में संदेश लिखकर अपनी प्रतिभा साबित की। सभी प्रदर्शों का गहन अवलोकन करते हुए डीपीएस बोकारो के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने बाल कलाकारों के पास जाकर उनसे उनकी कलाकृतियों के पीछे की सोच और भावनाओं को जाना। विद्यार्थियों के इस सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आज बच्चों ने केवल चित्र या मूर्तियां नहीं बनाई हैं, बल्कि अपनी सूक्ष्म संवेदनाओं से समाज के ज्वलंत प्रश्नों के उत्तर खोजे हैं। उन्होंने उक्त विषयों पर बच्चों की संवेदनशीलता को भविष्योन्मुखी बताया। कहा कि बच्चे ही कल के भविष्य हैं और एक सुरक्षित, शांत व समृद्ध विश्व के निर्माण के लिए उनकी यह वैचारिक और कलात्मक संवेदना अनिवार्य है। प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा बाद में की जाएगी।

और नया पुराने