सुहागिन महिलाओं ने पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर अपने-अपने पति की लंबी आयु की कामना की। 16 शृंगार कर महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा के बाद उसकी परिक्रमा की। वट वृक्ष पर पंखे की हवा करने के बाद पंडित से सत्यवान-सावित्री व्रत कथा का श्रवण किया। पंडित धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि वट सावित्री पूजा करने के उपरांत कथा का श्रवण करना जरूरी होता है। सावित्री ने सत्यवान को इसी वट वृक्ष के सामने यमराज से पुनर्जीवित कराने का सौभाग्य प्राप्त किया था।
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