पितृ प्रसन्न साधना शिविर में गूंजा सनातन धर्म का संदेश, गुरुदेव श्रीमाली ने कहा- पितरों की प्रसन्नता से घर में आती है शांति


हमारे सनातन धर्म का हजारों-हजारों वर्ष का गौरवशाली अतीत रहा है। इस देश में सैकड़ों वर्षों तक मुगलों और अंग्रेजों का शासन रहा। उन्होंने हमारे पूर्वजों पर पर लाख अत्याचार किए। धर्म पर आघात करने का कुत्सित प्रयास किया, लेकिन इन सबके बावजूद हमारा सनातन धर्म अडिग था, अडिग है और हमेशा अजर-अमर रहेगा। यह हमारे पितरों की ही देन है। उन्होंने दूसरे धर्म के आक्रमणकारियों की यातनाएं सहीं और संघर्ष करते हुए उन्हें सबक सिखाया। डरकर उन्होंने अपना धर्म नहीं बदला तथा अपने सनातन हिन्दू धर्म को अक्षुण्ण बनाए रखा। आज हम सभी का यह परम दायित्व है कि हम अपनी इस अमूल्य निधि की रक्षा करें। हमारी श्रद्धा और हमारा विश्वास अटल बना रहे। धर्मो रक्षति रक्षितः।' ये ओजपूर्ण बातें परमपूज्य गुरुदेव श्री नंदकिशोर श्रीमालीजी ने कहीं। रविवार को निखिल मंत्र विज्ञान (सिद्धाश्रम साधक परिवार) की ओर से बोकारो के सेक्टर- 4 स्थित बुद्ध विहार मैं आयोजित एकदिवसीय पितृ प्रसन्न कुल देवी-देवता साधना शिविर में उपस्थित हजारों साधकों को वे संबोधित कर रहे थे। परहमंस स्वामी निखिलेश्वरानंदजी महाराज (डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली) एवं वंदनीया माता भगवती की दिव्यतम छत्रछाया में आयोजित इस शिविर में झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों निखिल शिष्यों व धर्मानुरागियों ने भाग लिया। उन्हें संबोधित करते हुए गुरुदेव ने सनातन हिंदू धर्म, जीवन में पितरों की महत्ता तथा गुरु-शिष्य परंपरा व संबंधों पर प्रकाश डाला।

पितरों की प्रसन्नता के बिना घर में शांति संभव नहीं


अपने प्रवचन में गुरुदेव श्री श्रीमाली ने कहा कि हम पितरों की संतान हैं। पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है। यही वह समय है जब हम अपने श्रद्धा-सुमन उन्हें अर्पित करें। जब तक हमारे पितृ एवं कुल देवी-देवता प्रसन्न नहीं होते, घर में शांति नहीं आ सकती। जिस प्रकार पुस्तक में लिखे श्लोक स्थूल रूप में पुस्तकों में ही छपे रह जाते हैं और सूक्ष्म रूप से हमारे मस्तिष्क में अंकित हो जाते हैं, उसी प्रकार पितृपक्ष में पितरों को अर्पित किया जाने वाला  भोजन वे सूक्ष्म रूप से ग्रहण करते ही हैं। गुरु-शिष्य संबंधों की चर्चा करते हुए गुरुदेव नंदकिशोर श्रीमाली ने कहा कि हमारे पूर्वज हमारे भौतिक अस्तित्व का आधार हैं, तो गुरु हमारे आध्यात्मिक जीवन के मूल। जितनी आपकी श्रद्धा होगी, आपका संबंध उतना ही मजबूत होगा। गुरु शिष्य के जीवन में वह सूर्य हैं, जिनके प्रकाश से उसे चेतना मिलती है। गुरु ने जिसे चुन लिया, उसे भाग्य ने चुन लिया। गुरु भीतर ही भीतर संभालते हैं, लेकिन बाहर से चोट करते हैं। इस्पातनगरी बोकारो में स्टील प्लांट का जिक्र करते हुए गुरुदेव ने कहा कि जिस प्रकार यहां के संयंत्र में कमजोर से कमजोर मिनरल भी तपकर इस्पात बन जाता है, उसी प्रकार गुरु भी अपने शिष्य को स्टील के समान मजबूत बनाते हैं।

मन की ताजगी और भीतर का आनंद ही असल यौवन

व्यर्थ की चिंता न करने की प्रेरणा देते हुए गुरुदेव ने कहा कि जिसके जीवन में रस और आनंद हो, वह सदा सदैव युवा बना रह सकता है। यौवन उम्र या कोई शारीरिक अवस्था नहीं, बल्कि मन की ताजगी और भीतर का आनंद है और फिजूल की चिंता जीवन के रस को सुखा देती है। यह आपकी श्रद्धा-शक्ति को भी कमजोर करती है। जब किसी और का तंत्र आप पर न चले, तो ही आप वास्तव में स्वतंत्र होंगे। तंत्र कोई काला जादू, लाल किताब नहीं, बल्कि एक सिस्टम है, जिसे चलाने के लिए गुरुरूपी मार्गदर्शक जरूरी है। इसके पूर्व गुरुदेव के बोकारो आगमन पर निखिल शिष्यों ने बोकारो स्टील सिटी रेलवे स्टेशन से लेकर शिविर स्थल तक भव्य स्वागत किया। शिविर की शुरुआत गणेश पूजन, गुरु पूजन तथा भावपूर्ण निखिल आवाहन के साथ हुई। शिविर के संध्याकालीन सत्र में पितृ प्रसन्न साधना संपन्न कराई गई तथा विभिन्न प्रकार की शक्तिपात दीक्षाएं भी प्रदान की गईं, वहीं भारी संख्या में लोगों ने गुरुदीक्षा प्राप्त कर स्वयं को निखिल परिवार का हिस्सा बनाया। कार्यक्रम के दौरान अहले सुबह से ही बुद्ध विहार एवं जगन्नाथ मंदिर परिसर सहित आसपास का पूरा इलाका पीतांबरधारी निखिल शिष्यों की चहलकदमी से गुलजार बना रहा। शिविर में मंच संचालन मनोज भारद्वाज ने किया। इस अवसर पर निखिल परिवार के भजन गायक महेंद्र सिंह मानकर एवं उनकी मंडली द्वारा प्रस्तुत सुरीले भजनों से वातावरण भक्तिमय व निखिलमय बना रहा। मौके पर झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री अमर कुमार बाउरी, सिद्धाश्रम साधक परिवार, बोकारो के अध्यक्ष पीएन पांडेय, महासचिव विजय कुमार झा, शिविर के सहयोगी बीएनके श्यामला, दिलीप कुमार, जितेन्द्र प्रसाद, जेलर सिंह, संतोष ठाकुर, डा. अमरेन्द्र सिंह, मदन मोहन अग्रवाल, डा. रामप्रवेश सिंह, अजय कुमार सिंह, मोहन सिंह, अरुण वर्मा, मनोज कुमार, अभय वर्मा, विजय साहु, हरिकिशोर मंडल सहित हजारों साधक-साधिकाएं मौजूद रहे।

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