बोकारो में आदिवासी हो समाज ने धूमधाम से मनाया मागे पर्व


बोकारो के सेक्टर-8 स्थित सरना स्थल में आदिवासी हो समाज कमिटी की ओर से पर्व मागे पोरोब पारंपरिक रीति-रिवाज और उल्लास के साथ भव्य रूप से मनाया गया। कोल्हान सहित झारखंड के विभिन्न जिलों के आदिवासी समुदाय के लोगों ने आयोजन को यादगार बना दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दिऊरी (पुजारी) गंगाधर पुरती, सहयोगी नरसिंग पुरती एवं मनोज पुरती द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इसके बाद मांदर-नगाड़े (दमा-दुमंग) की गूंजती थाप पर सामूहिक पारंपरिक नृत्य और गीतों ने पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना दिया। युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे- सभी पारंपरिक वेशभूषा में झूमते नजर आए, जिससे शहर में भी गांव के पर्व जैसा माहौल बन गया। 

एक्ट्रेस मिताली होनहागा विशेष अतिथि के रूप में हुई शामिल 

कार्यक्रम में बतौर विशेष अतिथि हो फिल्म एवं एल्बम एक्ट्रेस मिताली होनहागा की उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। आयोजन समिति के संरक्षक ललित पूर्ति व संजय पूर्ति ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति प्रकृति से गहराई से जुड़ी है और बोकारो में हो समाज की बड़ी आबादी होने के कारण अपनी भाषा व संस्कृति को सहेजने की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि ‘मागे’ का अर्थ है स्त्री तुम ही हो तथा यह पर्व सृष्टि की उत्पत्ति और मानव रचना का प्रतीक है। समिति अध्यक्ष मुनेश बारी ने कहा कि मागे पर्व फसलों की कटाई और खेत-खलिहान के कार्य पूर्ण होने के बाद मनाया जाता है। हो समुदाय की मान्यता के अनुसार सृष्टि रचना के समय प्रथम मानव लुकू और लुकुमी की उत्पत्ति हुई, जिनकी संतान हम सभी हैं। मौके पर सचिव अनु बिरुली, कोषाध्यक्ष सुखसेन देवगाम, उप-कोषाध्यक्ष ब्रजमोहन तुबिद, निरंजन कुंकल, कृष्णा गगराई, तिरला चांपिया, दीपक मेलगांडी सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे। पर्व को सफल बनाने में दिकू, माणिक, बीरेंद्र, सीडीयू, बिशु, राजीव, कमल, जगत, सुनीता, लक्ष्मण, सिकन्दर, नंदनेश्वर, रमेश, मिरन समेत कई सदस्यों की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही।

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