पिछले 18 मई को चास के प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय में बच्चों से बाल मजदूरी जैसा काम करवाने की खबर प्रसारित होने के बाद 20 मई को एक ओर जहां नया मोड़ में बोकारो विकास फोरम की ओर से जिला शिक्षा पदाधिकारी जगरनाथ लोहरा का पुतला दहन किया गया, वहीं दूसरी ओर उस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने डीसी को पत्र लिखकर संबंधित हेडमास्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुतला दहन के बाद बोकारो विकास फोरम के अध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उनसे कचरा उठवाना और मजदूरी करवाना बेहद दुखद और शर्मनाक है। यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ क्रूर मजाक है।
शिक्षा व्यवस्था कमीशनखोरी की गिरफ्त में है
उन्होंने आरोप लगाया कि जिले की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की गिरफ्त में है। शिक्षकों की नियुक्ति, ट्रांसफर-पोस्टिंग और विभिन्न योजनाओं में भारी अनियमितताएं हो रही हैं तथा पूरी व्यवस्था दलालों के जरिए चलाई जा रही है। फोरम का आरोप है कि जिन बच्चों से मजदूरी कराई गई, उन्हें डराया और धमकाया भी जा रहा है। ताकि वे सच सामने न ला सकें। फोरम ने सवाल उठाया कि आखिर अब तक मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। यदि प्रशासन दोषियों को बचाने का प्रयास करेगा तो जनता चुप नहीं बैठेगी। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि दो दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो बोकारो में व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
डीईओ की संपत्ति की हो जांच
प्रदर्शन के दौरान फोरम ने जिला शिक्षा पदाधिकारी की संपत्ति की जांच कराने तथा शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग में कथित करोड़ों रुपये के घोटाले की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग भी की। फोरम ने कहा कि झारखंड सरकार इस वर्ष शिक्षा के लिए लगभग 19,320 करोड़ रुपये का बजट दे रही है, जबकि बोकारो जिले के लिए शिक्षा मद में करीब 1,750 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। बावजूद इसके स्कूलों की स्थिति बदहाल है और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बजाय उनसे काम करवाया जा रहा है। शिक्षा के नाम पर आवंटित जनता की गाढ़ी कमाई को कुछ अधिकारी दीमक की तरह चाट रहे हैं। यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के सपनों की हत्या है। बोकारो विकास फोरम ने स्पष्ट किया कि जब तक बच्चों को न्याय और दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। मौके पर वीरेंद्र कुमार चौबे, धर्मेंद्र कुमार, जनार्दन कुमार, रवि सिंह, सुरेश बाउरी, अनाथ बाउरी, सपन, झोलु, जयप्रकाश, दिलीप, शंकर, कार्तिक, मनोज, हीरा, मोतीलाल, दुर्गा, सुरेश एवं दिलीप उपस्थित रहे।
