स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा 'मुकुल' के नेतृत्व में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से लोकभवन, रांची में मिलकर झारखंड की गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं एवं राज्य की प्रमुख नदियों की दुर्दशा से संबंधित एक विस्तृत स्मार पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल महोदय का ध्यान विशेष रूप से बोकारो की जीवनरेखा गरगा नदी तथा उसकी सहायक सिंगारी जोरिया की भयावह स्थिति की ओर आकृष्ट कराया। ज्ञापन में कहा गया कि चास नगर निगम क्षेत्र एवं बोकारो इस्पात संयंत्र (सेल) की आवासीय कॉलोनियों से निकलने वाले गंदे नालों के प्रदूषित पानी का अनवरत प्रवाह वर्षों से गरगा नदी में किया जा रहा है. जिससे यह नदी अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है और एक गंदे नाले में परिवर्तित हो चुकी है। सिंगारी जोरिया भी प्रदूषण एवं अतिक्रमण के कारण गंभीर संकट में है।
अधिकांश प्रदूषित नदियों का पानी दामोदर में मिल रहा
देवनद दामोदर, रांची जमशेदपुर की जीवनरेखा स्वर्णरेखा नदी, बराकर नदी, खांजो नदी, गवाई नदी, इजरी नदी सहित झारखंड की अधिकांश नदियां शहरी गंदगी, औद्योगिक अपशिष्ट एवं रासायनिक कचड़ों के कारण प्रदूषण की चपेट में हैं। संस्थान ने मांग की कि नदी में प्रवाहित होने वाले गंदे नालों के प्रदूषित जल को पहले जल शोधन संयंत्र लगाकर साफ किया जाय फिर उसे नदी में छोड़ा जाए. बोकारो के आईटीआई मोड़ के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे चास नगर निगम द्वारा लंबे समय से कचरा डंप किए जाने की समस्या को भी उठाया। मौके पर संस्थान के उपाध्यक्ष अखिलेश ओझा, वृक्षारोपण प्रकोष्ठ के संयोजक वीरेंद्र कुमार चौबे तथा संस्थान के सह सचिव विजय प्रसाद गुप्ता शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड की नदियों, पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर विषयों को राज्यपाल महोदय के समक्ष प्रमुखता से रखा तथा इनके त्वरित समाधान की मांग की।
