राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बोकारो के महामंत्री कमलेश कुमार अग्रवाल ने एनसीटीई द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा टेट लागू करने की तिथि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा टेट की अनिवार्यता को अव्यावहारिक, दुर्भाग्यपूर्ण एवं नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध बताया। ज्ञात हो कि राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) संबंधी अधिसूचना 23 अगस्त 2010 को जारी किया गया था जिसमें उक्त तिथि से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टेट को अनिवार्य नहीं करते हुए बगैर टेट के सेवा में बने रहने का प्रावधान किया गया जबकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 1 मई 2025 एवं 29 मई 2026 के निर्णयानुसार 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए भी शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य किया गया है जो की एनसीटीई द्वारा दी गई छूट के विपरीत है।
टेट की अनिवार्यता शिक्षकों पर लागू करना न्यायोचित नहीं
जिला महामंत्री कमलेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से संबद्ध शिक्षक संगठन है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देश के 14 लाख से अधिक शिक्षक सदस्यों का अखिल भारतीय शिक्षक संगठन है जो अपने स्थापना काल से शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, शैक्षिक उन्नयन व राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए कर्मशील है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 से पूर्व वर्ष 1993 , 1999 , 2003 तथा 2009 में नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय प्रभावी नियमों एवं पात्रताओं के अनुरूप पूर्णतः वैध थी। बाद में निर्धारित पात्रता अथवा योग्यता मानदंडों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्यायोचित नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय के उक्त निर्णय से राज्य के लाखों सहायक शिक्षकों, सहायक अध्यापकों एवं उनके परिवारों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है जिससे शिक्षा व्यवस्था पर न सिर्फ प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा बल्कि शिक्षकों के मनोबल को भी प्रभावित करेगा।
आंदोलन की राह अपनाने को विवश हैं शिक्षक
एक तरफ शिक्षकों को सेवा में बने रहने और प्रोन्नति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य करते हुए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा परीक्षा पास करने की समय सीमा 31 अगस्त 2028 तय किया गया है, वहीं दूसरी ओर राज्य में वर्ष 2013 के बाद अब तक टेट आयोजित नहीं किया गया है। वर्तमान में टेट आवेदन की प्रक्रिया चल रही है , परंतु 2010 से पूर्व नियुक्त एवं सेवारत शिक्षकों को आवेदन करने के लिए पात्र नहीं समझा गया एवं उनके प्रशिक्षण अहर्ताओं का कोई विकल्प नहीं दिया गया. जिससे सभी शिक्षक टेट आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं। महासंघ के प्रदेश संयोजक विजय बहादुर सिंह ने इस विसंगति पर सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग झारखंड को अवगत कराया है। फलस्वरूप उक्त विसंगति का निराकरण करने एवं सभी सेवारत शिक्षकों को टेट आवेदन करने के लिए पोर्टल पर वांछित आवश्यक संशोधन करते हुए आवेदन की तिथि 20 जुलाई तक विस्तारित किए जाने संबंधी विभागीय निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अध्यक्ष राघवेन्द्र कुमार ने जानकारी दी कि महासंघ के राष्ट्रीय नेतृत्व ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की तथा अधिसूचना के माध्यम से शिक्षकों के हितों की रक्षा का आग्रह किया। वहीं उपाध्यक्षद्वय कमल सिंह एवं लक्ष्मण सिंह के अनुसार राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर सभी राज्यों एवं जिलों में व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। मौके पर महासंघ के अध्यक्ष राघवेन्द्र कुमार, महामंत्री कमलेश कुमार अग्रवाल, उपाध्यक्षद्वय कमल सिंह एवं लक्ष्मण सिंह उपस्थित थे।
