विद्यार्थियों को बताया गया मानवता और शांति को साथ लेकर चलने का तरीका


परिणाम एवं तुलना का संघर्ष आज के समय में अधिकांश विद्यार्थियों के लिए तनाव का कारण बनता जा रहा है। चिन्मय विद्यालय बोकारो में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने एवं तनाव कम करने के तरीके को लेकर एक खास कार्यशाला का आयोजन 7 अगस्त, शुक्रवार को किया गया। शांति शिक्षा कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को संबोधित करने के लिए द प्रेम रावत फाउंडेशन के प्रतिनिधि विद्यालय के स्वामी तपोवन सभागार में मौजूद रहे। इनमें रांची पोस्टल इंस्पेक्टर उदय कुमार, द प्रेम रावत फाउंडेशन की सदस्य रीमा देवी एवं सोनाली देवी उपस्थित रहीं। साथ ही, विद्यालय सचिव महेश त्रिपाठी, प्राचार्य सूरज शर्मा, वरीय उप प्राचार्य नरमेंद्र कुमार एवं उप प्राचार्य डॉ. रोशन शर्मा उपस्थित रहे। कार्यशाला की शुरुआत मुख्य वक्ता उदय कुमार एवं अन्य सदस्यों को सैपलिंग भेंट कर की गई। इसके बाद, कार्यशाला का संचालन करते हुए समृति वोहरा ने सभी उपस्थित अतिथियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। दीप प्रज्वलित कर परम पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती का आर्शीवाद लिया गया। इसके बाद मुख्य वक्ता उदय कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने सबसे पहले सभी को द प्रेम रावत फाउंडेशन के बारे में, इसके कार्यों के बारे में एवं प्रेम रावत के जीवन से परिचित किया। इसके बाद उन्होंने एक वीडियो की सहायता से विद्यार्थियों को प्रेम रावत के विचारों के बारे में बताया। 

हमेशा दिमाग से पहले दिल की आवाज़ सुनें विद्यार्थी 

उदय कुमार ने विद्यार्थियों से कहा कि हमेशा दिमाग से पहले दिल की आवाज़ सुनें। दिमाग किसी भी कार्य या विषय के बारे में पेशेवर रूप से सोचता है। जबकि, दिल में अधिक व्यावहारिक भावना होती है। उन्होंने कहा कि पूरे जीवन दिल को केवल शांति एवं सुकून चाहिए। इन दो को अपना लेने से सफलता की राह अधिक सरल बन सकती है एवं जीवन से कठिनाइयों को भी कम किया जा सकता है। अंत में उन्होंने पूरे विद्यालय परिवार का इस कार्यशाला को सफल बनाने के लिए धन्यवाद किया। कार्यशाला के विषय के संबंध में प्राचार्य श्री सूरज शर्मा ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में तनाव अधिक लेते हैं। ऐसे में उनके लिए आत्म शांति बहुत जरूरी है। अगर मेहनत, आत्म शांति और स्मार्ट वर्क को एक साथ अपना लिया जाए, तो सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थियों को संतोष की भावना सीखनी चाहिए और दूसरों से खुद की तुलना किसी भी रूप में नहीं करनी चाहिए। अंत में उन्होंने द प्रेम रावत फाउंडेशन के सभी मौजूद प्रतिनिधियों का धन्यवाद किया एवं उन्होंने पुस्तक भेंट कर सम्मानित भी किया। द प्रेम रावत फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसकी स्थापना 2001 में प्रेम रावत ने की थी। यह संस्था भोजन, पानी और शांति जैसी मूलभूत मानवीय जरूरतों को पूरा करके लोगों के जीवन में गरिमा और समृद्धि को बढ़ावा देती है। 

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