कर्मचारी की मौत पर ग्रामीणों का आक्रोश, इलेक्ट्रोस्टील वेदांता गेट जाम; 45 लाख के मुआवजे पर समझौता


बोकारो के चंदनकियारी स्थित इलेक्ट्रोस्टील वेदांता में कार्यरत भागाबांध गांव निवासी 47 वर्षीय हराधन महतो की हादसे में मौत हो गई। बताया जाता है कि नाले में गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों एवं ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। घटना से क्षुब्ध ग्रामीणों ने मृतक के आश्रितों को उचित मुआवजा एवं नियोजन देने की मांग को लेकर इलेक्ट्रोस्टील वेदांता प्लांट के गेट को जाम कर दिया। ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन करीब 10 घंटे से अधिक समय तक चला। इस दौरान ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन से मृतक के परिवार को समुचित आर्थिक सहायता, आश्रित को नियोजन तथा हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया शव 

मृतक के परिजनों ने कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती तो इस तरह का हादसा नहीं होता। परिजनों ने मृतक के परिवार के भविष्य को देखते हुए उचित मुआवजा एवं एक आश्रित को नौकरी देने की मांग की। घटना की सूचना मिलने पर सियालजोरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया। प्रशासन, कंपनी प्रबंधन, मृतक के परिजनों एवं ग्रामीणों के बीच वार्ता भी हुई। वार्ता के दौरान मृतक के परिवार को मिलने वाले मुआवजे एवं अन्य मांगों को लेकर चर्चा की गई। वार्ता के दौरान ईएसएल प्रबंधन और मृतक के परिजनों के बीच समझौता हुआ। 

मुआवजा के तौर पर 45 लाख रुपए देने पर बनी सहमति 

समझौते के तहत ग्रुप टर्म लाइफ इंश्योरेंस, पर्सनल एक्सीडेंटल क्लेम, पीएफ, ईएसआई सहित कुल 45 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति बनी। इस समझौते के बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन समाप्त किया। वार्ता में ईएसएल की सीएचआरओ श्यामली कुमारी, पीआरओ-एचआर संजय सिन्हा, श्रमायुक्त रंजीत कुमार, सियालजोरी थाना प्रभारी रंजीत प्रसाद तथा परिजनों की ओर से निमाई, लक्ष्मी, चंद्रशेखर, दुर्गा प्रसाद, प्रकाश आदि उपस्थित रहे। बताया गया कि मृतक हराधन महतो अपने पीछे पत्नी, एक पुत्री तथा 12-13 वर्षीय पुत्र को छोड़ गए हैं। परिवार में कमाने वाले सदस्य की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने प्रशासन एवं कंपनी प्रबंधन से मृतक के आश्रित परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शीघ्र उचित कदम उठाने की मांग की है।

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