5 दिवसीय साप्ताहिक कार्यदिवस अविलंब लागू करने, प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि के भुगतान में भेदभाव के विरोध में, नई पेंशन योजना वाले कर्मियों के लिए भी पुरानी पेंशन योजना लागू करने, पुरानी पेंशन योजना का अपडेशन करने एवं अन्य लंबित मांगों, जिसमें गुणवत्तापूर्ण ग्राहक सेवा देने के लिए सभी संवर्गों में अविलंब बहाली की मांग भी शामिल है, यथाशीघ्र समाधान की मांग के लिए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) जिसमें बैंकों में कार्यरत प्राय: सभी यूनियन यथा एआईबीए, एआईबीओसी, एनसीबीई, बीईएफआई। एआईबीओए, आईएनबीईएफ, आईएनबीओसी संगठन शामिल हैं, उनके द्वारा पूर्व में ही अपने आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की घोषणा कर दी गई थी. जिसके तहत दिनांक 11 सितंबर को पूरे देश के साथ-साथ बोकारो जिले में भी एक दिवसीय से हड़ताल की गई थी। जो शतप्रतिशत सफल रहा था। बावजूद इसके ना ही भारत सरकार और ना ही बैंक प्रबंधन के कानों पर जूं रेंगी। मजबूरन 28, 29 एवं 30 सितंबर को तीन दिवसीय हड़ताल का नोटिस देना पड़ा।
बैंक ऑफ़ इंडिया के समीप किया गया प्रदर्शन
इस घोषित हड़ताल को सफल करने के लिए पूर्व से आंदोलनात्मक कार्यक्रम के अनुसार गुरुवार को बैंक आफ इंडिया, बोकारो स्टील सिटी शाखा के प्रांगण में संध्या 5.30 बजे से एक विशाल प्रदर्शन किया गया। जिसमें चास बोकारो एवं आसपास के सभी बैंकों के कर्मचारी एवं अधिकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के जिला संयोजक सिद्धेश नारायण दास ने उपस्थित सभी जनों को संबोधित करते हुए कहा कि इंडियन बैंक एसोसिएशन के बीच 2024 में ही 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने के लिए लिखित समझौता हुआ था। जिसके तहत यूनियन द्वारा प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने पर भी सहमति प्रदान की गई थी। किंतु भारत सरकार ने 2 साल बीत जाने के बाद भी इसे लागू करने के लिए अपनी सहमति प्रदान नहीं की है। जबकि देश के प्रायः वित्तीय संस्थानों याथा रिजर्व बैंक आफ इंडिया, भारतीय जीवन बीमा निगम, सेबी आदि 05 दिवस के कार्य सप्ताह लागू हैं। पता नहीं क्यों हम बैंकर्स के साथ इस प्रकार का अत्याचार क्यों किया जा रहा है।
15 दिन का प्रोत्साहन राशि भी नहीं मिल रहा
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा निदेशालय द्वारा अचानक से समझौते को उल्लंघन करते हुए सभी कर्मचारी एवं स्केल 3 तक के अधिकारियों को मात्र 15 दिन का प्रोत्साहन राशि देने पर एवं उसके ऊपर स्केल-4 से ऊपर तक के अधिकारियों को 365 दिन का प्रोत्साहन राशि देने के लिए जारी कर दिया गया। यूनियन के द्वारा आंदोलन की घोषणा के उपरांत केंद्रीय श्रम आयुक्त ने सभी पक्षों को बुलाकर समझौता के लिए वार्ता प्रारंभ किया, जो 8 एवं 9 सितंबर 26 तक लगातार किया गया, किंतु भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा निदेशालय द्वारा भुगतान को तत्काल लंबित करने का ही आश्वासन दिया गया। उन्होंने सभी आम जनों एवं ग्राहकों को होने वाली सुविधा पर खेल जताते हुए आग्रह किया क्या अभी हमारे अंग है आपके साथ के बिना हम अधूरे हैं. अतः आप सभी ग्राहकों का भी हम सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा करते हैं।
26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
सभा को संबोधित करने वाले यूनियन के अन्य घटक संगठनों के नेताओं ने सभा को संबोधित करते हुए भारत सरकार को आगाह किया हमारी मांगों पर अविलंब सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन और तीव्र होगा एवं 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल भी किया जा सकता है। इसकी सारी जिम्मेदारी आईबीए एवं भारत सरकार की होगी। प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में प्रमुख रूप से साथी से देश नारायण दास राघव कुमार सिंह राजीव कुमार सिंह कृष्ण मुरारी राजेश ओझा पंकज कुमार प्रदीप झा राकेश मिश्रा अवधेश प्रसाद नीरज तिवारी राजेश श्रीवास्तव अरुण कुमार कृष्णा तिवारी बबलू कुमार सरोज कुमार अतुल दुबे संतोष कुमार राजकुमार प्रसाद सोनू कुमार उर्मिला कुमारी आदि उपस्थित थे।
