आंगनबाड़ी केंद्रों में शिक्षा–स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने पर डीसी गंभीर: दी चेतावनी


समाहरणालय सभागार में उपायुक्त अजय नाथ झा ने समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति कार्य की समीक्षा किया। मौके पर उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी डा. सुमन गुप्ता, सहायक निदेशक पियूष आदि उपस्थित थे। समीक्षा क्रम में उपायुक्त ने कहा कि सभी सीडीपीओ - एलएस एवं अन्य कर्मी संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें तथा योजनाओं की प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा सुनिश्चित करें, ताकि प्रदर्शन में सुधार आएं। उन्होंने इस दिशा में तुरंत पहल करने को कहा। विभाग के कार्यों में संतोषजनक प्रदर्शन नहीं होने पर नाराजगी जताई। 

राज्य सरकार की है महत्वपूर्ण योजना 


बैठक में उपायुक्त ने कहा कि सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना राज्य सरकार की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जिसका लक्ष्य किशोरियों को शिक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। समीक्षा क्रम में पाया कि जिले के सभी परियोजना में लगभग 17,835 आवेदन सत्यापन के लिए लंबित है। इस पर निर्देश दिया कि सभी लंबित आवेदनों को आगामी 20 दिसंबर तक हर हाल में निष्पादन किया जाए। इस कार्य में बीईईओ - बीआरपी - सीआरपी आदि को लगाने को कहा। वहीं, सभी स्वीकृत लाभुकों को समयबद्ध रूप से राशि का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने बैठक में उपस्यथित उप विकास आयुक्त को प्रत्येक 15 दिनों में समीक्षा का निर्देश दिया। वहीं, सीडीपीओ को भी प्रखंड स्तर पर आवेदनों का नियमित समीक्षा करने को कहा, ताकि किसी भी पात्र किशोरी का आवेदन लंबित नहीं रहे।

आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली कनेक्शन - रख रखाव मद से करें खर्च

उपायुक्त ने कहा कि जिले के लगभग 1329 आंगनबाड़ी केंद्र अभी भी बिजली आपूर्ति से वंचित हैं, जिसके कारण बच्चों को दी जाने वाली पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक शिक्षा सेवाओं में बाधा आती है। उन्होंने निर्देश दिया कि केंद्रों को उपलब्ध रख रखाव मद की राशि का उपयोग कर सभी ऐसे केंद्र बिजली कनेक्शन लेना सुनिश्चित करें। वहीं, वैसे केंद्र जिन्होंने अब तक बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं किया है, उन्हें आवेदन करने का निर्देश दिया। बैठक में उपस्थित चास एवं बेरमो के कार्यपालक अभियंता को निर्देशित किया कि वे परियोजनावार बिजली कनेक्शन के लिए शिविर आयोजित करें।

जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों का सर्वे कर स्कूल को-लोकेशन कार्य में लाएं तेजी

जिले के जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों का शिक्षा विभाग से समन्वय कर सर्वे कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। कहा कि जिन केंद्रों की स्थिति उपयोग योग्य नहीं रह गई है, उन्हें निकट स्थित सरकारी स्कूलों के साथ को-लोकेट कर दिया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण में पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा निरंतर मिलती रहें। सभी संबंधित को यह कार्य 15 दिसंबर तक हर हाल में पूरा करने को कहा। जानकारी हो कि जिले में कुल 944 जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र चिन्हित हैं, जिसमें 413 सर्वे कर स्कूल को-लोकेशन हो गया है, शेष 531 किया जाना है।

पोषण ट्रैकर एप अपडेटिंग पर करें कड़ी निगरानी

उपायुक्त ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे केंद्रों का नियमित व ससमय संचालन सुनिश्चित करें। इस कार्य में किसी भी तरह की कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे कर्मियों को चिन्हित कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। पोषण ट्रैकर एप पर लाभुकों के डाटा की नियमित अपडेटिंग जरूरी है। डाटा एंट्री में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाएगा। गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों से संबंधित सूचनाओं में शत-प्रतिशत सही सुनिश्चित की जाए। डाटा स्थिति के आकलन के लिए महत्वपूर्ण आधार है।

नियमित करें क्षेत्र भ्रमण 

समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि डीएसडब्ल्यूओ, सीडीपीओ एवं एलएस नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण करें। अपना - अपना टूर प्रोग्राम बनाएं और जिला को प्रतिवेदित करें। आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियों का निरीक्षण करते हुए जिला को रिपोर्ट करें। किसी भी प्रकार की कमी या अनियमितता मिलने पर सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाएं। उपायुक्त ने कहा कि आइसीडीएस का उद्देश्य सिर्फ योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं बल्कि मातृ एवं शिशु पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा की बेहतरी है, इसलिए फील्ड स्तर पर मजबूत उपस्थिति आवश्यक है। हमें इसके मूल उद्देश्य को पूरा करना है। आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं की दक्षता में वृद्धि के लिए उपायुक्त ने कहा कि सभी सेविकाओं एवं सहायिकाओं को नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। एप संचालन - लाग इन - लाग आउट के संबंध में जरूरी बातें बताएं। उन्होंने समन्वयक पोषण ट्रैकर/सैम को भी इस बाबत जरूरी दिशा - निर्देश दिया।



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