सेक्टर 05 स्थित अयप्पा मंदिर में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित विशेष पूजा एवं शोभा यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। इस आध्यात्मिक आयोजन में उपायुक्त अजयनाथ झा की उपस्थिति ने श्रद्धालुओं के उत्साह को और भी बढ़ा दिया। अयप्पा की शोभा यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मसंयम, अनुशासन और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है। नंगे पांव, सरल वेश और संयमित आचरण के साथ चल रहे श्रद्धालु यह संदेश दे रहे थे कि सच्ची भक्ति दिखावे से नहीं, बल्कि आत्मनियंत्रण और शुद्ध जीवन मूल्यों से जुड़ी होती है। स्वामीये शरणम अयप्पा” का गूंजता उद्घोष वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। यह उद्घोष समानता और समरसता का प्रतीक है, जहाँ जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र के सभी भेद मिट जाते हैं और हर भक्त केवल एक पहचान रखता है - अयप्पा का शरणागत।
आस्था समाज को एक सूत्र पिरोने का कार्य करती है
इस अवसर पर उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि जब व्यक्तिगत साधना सार्वजनिक स्वरूप लेती है, तब वह समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे की मजबूत नींव रखती है। अयप्पा की परंपरा हमें जोड़ने, सहनशील बनने और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने की प्रेरणा देती है। अयप्पा की शोभा यात्रा हमारी सांस्कृतिक विरासत में विविधता में एकता का सुंदर उदाहरण है, जो यह सिद्ध करती है कि आस्था समाज को विभाजित नहीं, बल्कि एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मंदिर समिति के सदस्य एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरा क्षेत्र भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।
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