AI से बदलेगी कक्षा की तस्वीर: शिक्षकों को मिला AI का व्यावहारिक प्रशिक्षण


आज के डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शिक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। स्कूलों की कक्षाओं में एआई आधारित टूल्स का उपयोग छात्रों को अधिक प्रभावी, रोचक और व्यक्तिगत सीखने का अनुभव प्रदान कर रहा है। स्मार्ट बोर्ड, वर्चुअल टीचर, ऑटोमेटेड असेसमेंट और पर्सनलाइज्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म जैसे साधनों ने पढ़ाई के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। इसकी उपयोगिता और इन टूल्स के उपयोग के विषय में विस्तार से सीखने के उद्देश्य से चिन्मय विद्यालय, बोकारो में तेजोमयानंद सभागार में 'शिक्षण में AI का समावेश' विषय पर शिक्षकों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम - ट्रेनिंग आयोजित की गई। इसमें संसाधन व्यक्ति के रूप में  सोमने चक्रबर्ती और गीबेन थॉमस मौजूद रहे। साथ ही, विद्यालय के सचिव महेश त्रिपाठी, प्राचार्य सूरज शर्मा और उप प्राचार्य नरमेंद्र कुमार उपस्थित रहे।

वर्चुअल क्लास रूम और चैटबॉट की दी गई जानकारी 

ट्रेनिंग का संचालन विद्यालय की एचआर सुप्रिया चौधरी ने किया। इसके बाद दोनों संसाधन व्यक्तियों ने शिक्षकों को एआई के बारे में जानकारी दी। पूरी ट्रेनिंग को कई सेशन में बांटा गया, जिसमें एआई के उपयोग, एआई के दुष्परिणाम, इसकी गुणवत्ता, साइबर सेफ्टी, साइबर फ्रॉड, जैसे विषय शामिल थे। ट्रेनिंग के दौरान शिक्षकों से कई गतिविधियां भी कराई गई। इसके अलावा, वर्चुअल क्लासरूम और चैटबॉट जैसे एआई टूल्स के बारे में संसाधन व्यक्तियों ने जानकारी दी, जिससे छात्रों के सवालों का तुरंत उत्तर देकर उनकी पढ़ाई के प्रति अधिक रुचि बनाई जा सकती है। सोमेन चक्रबर्ती ने कहा कि एआई शिक्षकों के लिए किसी वरदान की तरह है। शिक्षक अपनी कक्षाओं को अधिक रोचक और समावेशी बना सकते हैं। 

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