बोकारो जिले से 45 किलोमीटर दूर कसमार प्रखंड स्थित मृगी खोह प्राकृतिक सुंदरता के लिए काफी प्रसिद्ध है. लोग यहां पर सहज खींचे चले आते हैं. यहां का दृश्य बड़ा ही मनोरम है. यहां का प्राकृतिक दृश्य काफी आकर्षक है. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम जब मृग की पीछे भागते हुए मृग पर वाण चलाया तब उस वाण के प्रहार से चट्टान टूट गया था. जिसके अंदर मृग घुस गया था. आज भी उस जगह में सालों भर पानी की बूंदें टपकती रहती है.
दूर-दराज से लोग आते हैं यहां
मृगी खोह की प्राकृतिक छटा को देखने के लिए इस जिले के अलावे धनबाद, गिरिडीह और बंगाल के लोग यहां आते हैं. ठंड के दिनों में इस जगह पिकनिक मनाने के लिए भारी संख्या में लोग यहां आते हैं. मकर संक्रांति में यहां प्रति वर्ष मेला लगता है. इस मेले में मंत्री व विधायक सहित काफी संख्या में जनप्रतिनिधि यहां पहुंचते हैं. बुधवार को दी खबरली की टीम वहां पहुंची। वहां पर धनबाद सहित आसपास से पहुंचे लोगों से बातचीत भी की गई.
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