अब निजी स्कूलों की पुस्तकों पर की जाने वाली मनमानी पर लगेगी रोक, डीसी ने दिया आदेश


समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में बुधवार को उपायुक्त अजय नाथ झा ने जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के प्रबंधन और प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में शिक्षा निदेशक, प्राचार्य और शिक्षक भी उपस्थित थे। बैठक का उद्देश्य बच्चों और अभिभावकों की सुविधा सुनिश्चित करना और स्कूल में पारदर्शी एवं सकारात्मक शैक्षिक वातावरण बनाना था। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि सभी निजी विद्यालय अपनी किताबों की सूची 10-15 दिन पहले सार्वजनिक करें, ताकि अभिभावक किसी भी दुकान या ऑनलाइन माध्यम से सुविधाजनक रूप से किताबें खरीद सकें। उन्होंने कहा कि इससे अभिभावकों को समय पर तैयारी करने में मदद मिलेगी और छात्रों को पढ़ाई में कोई व्यवधान नहीं होगा।

पिछला बकाया फीस पर स्कूल में चर्चा नहीं करें 

बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि बच्चों की पिछली बकाया फीस के बारे में सार्वजनिक रूप से किसी अन्य छात्र या क्लास में चर्चा न की जाए, बल्कि केवल स्कूल डायरी में लिखें। इससे बच्चों की मानसिक शांति बनी रहेगी और किसी भी तरह की शर्मिंदगी से बचा जा सकेगा। उपायुक्त ने सभी स्कूलों से कहा कि पैरेंट–टीचर मीटिंग नियमित रूप से आयोजित करें, जिसमें निदेशक, प्राचार्य और शिक्षक सभी शामिल हों। यह सुनिश्चित करने के लिए है कि अभिभावक बच्चों की प्रगति और विद्यालय की गतिविधियों के बारे में सीधे संवाद कर सकें। इसके अतिरिक्त, उपायुक्त ने विद्यालयों से कहा कि अभिभावकों को बेवजह परेशान न किया जाए, और ड्रेस कोड की तस्वीर प्रकाशित की जाए, ताकि अभिभावक कहीं से भी उसे खरीद सकें।

सभी नियमों को पारदर्शी तरीके से करें लागू 

उपायुक्त ने सभी विद्यालयों के प्रबंधन को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि इन नियमों और उपायों को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू करें। उनका कहना था कि इससे न केवल अभिभावकों और छात्रों की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि शिक्षा का वातावरण भी सकारात्मक और सम्मानजनक बना रहेगा। इसके अलावा कई अन्य बिंदुओं पर उपायुक्त ने चर्चा करते हुए जरूरी दिशा – निर्देश दिया। मौके पर उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, जिला शिक्षा पदाधिकारी जगरनाथ लोहरा, जिला शिक्षा अधीक्षक अतुल कुमार चौबे आदि उपस्थित थे।


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