बोकारो परिसदन में सोमवार को भाकपा माले की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) के विस्थापितों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। पार्टी के राज्य स्थायी कमेटी के सदस्य दिलीप तिवारी ने आरोप लगाया कि बीएसएल प्रबंधन और सरकार विस्थापितों के साथ लगातार उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपनी जमीन और आजीविका औद्योगिक विकास के लिए दी, आज वही अपने अधिकारों के लिए भटकने को मजबूर हैं। दिलीप तिवारी ने कहा कि विस्थापित परिवार वर्षों से रोजगार, पुनर्वास, मुआवजा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार और बीएसएल प्रबंधन की उदासीनता के कारण विस्थापितों एवं स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस पहल नहीं हुई तो यह आक्रोश बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है। उन्होंने सरकार से विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा करते हुए सभी लंबित मांगों पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।
विस्तारीकरण के काम में विस्थापितों को मिले हिस्सेदारी
प्रेस वार्ता में विस्थापित क्रांति मोर्चा के अध्यक्ष सह भाकपा माले नेता राजू दुबे ने कहा कि बीएसएल की स्थापना के समय हजारों परिवारों ने अपनी जमीन दी थी, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार रोजगार और सम्मानजनक पुनर्वास से वंचित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार आंदोलन और ज्ञापन देने के बावजूद उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि विस्थापितों के बच्चों को रोजगार, प्रभावित परिवारों का समुचित पुनर्वास और लंबित मामलों का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए। भाकपा माले और विस्थापित क्रांति मोर्चा के नेताओं ने संयुक्त रूप से चेतावनी दी कि यदि सरकार और बीएसएल प्रबंधन ने विस्थापितों की समस्याओं के समाधान की दिशा में शीघ्र पहल नहीं की, तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी सरकार और बीएसएल प्रबंधन की होगी। प्रेस वार्ता में श्याम रवानी, कन्हैया रजवार, ए. दास सहित अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद थे।
