नीले आसमान में लहराता डीपीएस बोकारो का हरित ध्वज और नीचे ड्रोन से होती 'बीज-बमों' की बारिश। विश्व ओजोन दिवस (16 सितंबर) के अवसर पर दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), बोकारो ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहद रोमांचक, अत्याधुनिक और अनूठी मिसाल पेश की। अपने 'गो ग्रीन इनिशिएटिव' के तहत विद्यालय के ईको-वॉलंटियर्स की समर्पित टोली ने प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार के कुशल नेतृत्व में सेक्टर-4 एफ स्थित सूर्य मंदिर के समीप खुले क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से 500 से अधिक बीज-बमों की बौछार कर एक नया हरित इतिहास रच दिया। बीज-बम के भीतर नीम, साल, पलाश, महोगनी, अशोक, अर्जुन आदि के बीज थे। हरियाली फैलाने के इस आधुनिक तरीके में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डॉ. गंगवार ने स्वयं भी ड्रोन संचालित कर बीज-बम बरसाए तथा हाथों से भी यत्र-तत्र बीजों के गोलों को फैलाया। वहीं, इस अभियान के दौरान उड़ते हुए दो-दो ड्रोन से बीज-बमों का नजारा देखने को आसपास के लोग भी बड़ी संख्या में वहां कौतूहलवश जमा हो गए।
पर्यावरण बचाने का शक्तिशाली हथियार है 'बीज बम'
यह 'बीज बम' कोई साधारण गोला नहीं, बल्कि पर्यावरण को बचाने का एक शक्तिशाली जैविक हथियार बन चुका है। मिट्टी, गोबर की प्राकृतिक खाद और स्थानीय बीजों के मिश्रण से तैयार किए गए इन बीजों के गोलों को छांव में सुखाकर बंजर या दुर्गम इलाकों में डाला जाता है। बारिश की चंद बूंदें पड़ते ही मिट्टी नरम होती है और इसके भीतर छिपे जंगली तथा फलदार प्रजातियों के पेड़ों के बीज अंकुरित होकर पौधों में तब्दील हो जाते हैं। यह न केवल बंजर जमीन पर हरित आवरण को बढ़ाता है, बल्कि जैव विविधता को मजबूत कर वन्यजीवों के लिए भोजन का प्राकृतिक स्रोत भी तैयार करता है।
बोले प्राचार्य : ओजोन परत की सुरक्षा ही जीवन की सुरक्षा
प्राचार्य डॉ. गंगवार ने विश्व ओजोन दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पृथ्वी का सुरक्षा कवच मानी जाने वाली ओजोन परत के क्षरण को रोकना पूरी मानव जाति का नैतिक दायित्व है। उन्होंने इस वर्ष की थीम ग्लोबल एक्शन फॉर ए कूलर प्लैनेट यानी एक ठंडे ग्रह के लिए वैश्विक कार्रवाई पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से संपूर्ण जीव-जगत की रक्षा करती है। ओजोन के संरक्षण के साथ-साथ आज हमें पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ शीतलन तकनीकों को अपनाना होगा। पेड़-पौधे ही हमारी धरती के प्राकृतिक एयर कंडीशनर हैं। यदि हमें बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन से इस ग्रह को बचाना है, तो अधिकाधिक पौधारोपण ही एकमात्र स्थायी समाधान है।
तीन बार 'ग्रीन स्कूल अवार्ड' से सम्मानित हो चुका है डीपीएस बोकारो
उल्लेखनीय है कि प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार के मार्गदर्शन में डीपीएस बोकारो सदैव प्रकृति और पर्यावरण को सहेजने के लिए कटिबद्ध रहा है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा के प्रयोग और वृहद स्तर पर पौधारोपण अभियानों जैसी क्रांतिकारी पहलों का ही सुखद परिणाम है कि विद्यालय को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीन-तीन बार प्रतिष्ठित 'ग्रीन स्कूल' पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। प्राचार्य ने इसमें विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी तथा विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों के सहयोग को काफी अहम बताया।
