UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, CJI बोले- हो सकता है दुरुपयोग


सुप्रीम कोर्ट आज यूजीसी के नए भेदभाव विरोधी नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की. याचिकाकर्ता का कहना है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और इन्हें लेकर देशभर में विरोध हो रहा है. अदालत ने तत्काल सुनवाई पर सहमति जताते हुए कहा है कि वह मामले की स्थिति से अवगत है. नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है, जिनमें ओबीसी, एससी, एसटी, महिलाओं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व जरूरी होगा. आलोचकों का आरोप है कि नए नियमों में स्पष्ट प्रक्रिया का अभाव है और इनके दुरुपयोग की आशंका बनी हुई है. उनका कहना है कि नया ढांचा ओबीसी समुदाय को संभावित पीड़ित मानता है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों को बाहर रखता है, जिससे उन्हें भेदभाव का स्थायी दोषी बताया जा रहा है. इन नियमों के खिलाफ कई राज्यों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा दिलाया है कि नियमों का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा और किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि नए नियम अस्पष्ट हैं. कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी.

अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी 

यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई की. विष्णु शंकर जैन ने याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें देनी शुरू की. जैन ने कहा कि इससे समाज में विभेद पैदा हो रहा है. उन्होंने नियम के सेक्शन 3C को चुनौती दी. विष्णु जैन ने कहा कि इस अधिसूचना की धारा 3(c) में SC, ST, OBC के खिलाफ जाति आधारित भेदभाव के रूप में परिभाषित किया गया है. इसमें जनरल कैटेगरी के सदस्यों को पूरी तरह से बाहर रखा गया है. ये 3C अनुच्छेद 14 पर असर डालती है और E में दी गई परिभाषा पूरी तरह से भेदभाव पूर्ण है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। 

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