बोकारो में बैंक कर्मचारियों की रही हड़ताल, बारिश में भी निकली विशाल रैली; 5 दिवसीय कार्यदिवस की मांग तेज


यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) जिसमें बैंकों में कार्यरत सभी यूनियनों के द्वारा पूर्व से घोषित आंदोलनात्मक कार्यक्रम के तहत बोकारो जिले के सभी बैंकों में शत्-प्रतिशत हड़ताल रहा एवं बैंकों के सभी शाखाएँ व कार्यालयों में पूर्ण तालाबंदी रहा। इस अवसर पर बोकारो में चास, बोकारो एवं आस-पास के बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने सैकड़ों की संख्या में उपस्थित होकर स्थानीय बैंक ऑफ इंडिया, बोकारो स्टील सिटी शाखा, सेक्टर-4 से एक रैली निकाली जो पूरे सिटी सेंटर का भ्रमण करते हुए भारतीय स्टेट बैंक, सेक्टर-4 के सामने विशाल सभा में परिवर्तित हुई। रैली की विशेषता यह रही कि जहाँ बैंकों में कार्यरत महिला कर्मचारियों-अधिकारियों की संख्या अभूतपूर्व रही वहीं उनके साथ बाकी के सभी कर्मचारी-अधिकारीगण अपनी ऐतिहासिक उपस्थिति के साथ वर्षा में भींगते हुए रैली को अभूतपूर्व रूप से सफल किया। 

05 दिवसीय कार्यदिवस जल्द लागू करना होगा 

सभी संग्रामी बैंक कर्मियों जिसमें कर्मचारियों से लेकर स्कैल-3 तक के अधिकारियों का जोश एवं जज्बा देखने लायक रहा। यह हड़ताल पूरे देशभर में ऐतिहासिक रूप से सफल रहा। भारत सरकार की हठधर्मिता के कारण बैंक कर्मी हड़ताल में जाने के लिए विवश हो गये। ज्ञात हो कि यह हड़ताल कर्मचारियों एवं स्केल-3 तक के अधिकारियों जिनकी संख्या बैंकों में लगभग 93 प्रतिशत है, के साथ ‘‘प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन’’ के भुगतान में भेदभाव के विरोध में, 05 दिवसीय कार्यदिवस जल्द लागू करने एवं सभी लंबित मुद्दों का यथाशीघ्र समाधान करने हेतु प्रारंभ किये गये आंदोलन की कड़ी में आज सम्पूर्ण देश में किये जाने वाले एक दिवसीय हड़ताल की कड़ी में यहाँ भी पूर्ण हड़ताल किया गया। यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के जिला संयोजक ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इंडियन बैंक एसोसिएशन एवं यूनियन्स के बीच हुई वार्त्ताओं में परफॉर्मेंस लिंक्ड इन्सेंटिव पर स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित किया गया था कि यह पूर्णतया बैंकों के परफॉर्मेंस पर आधारित होगा एवं सभी कर्मचारियों एवं स्केल तक के अधिकारियों को समान रूप से निर्धारित दिनों के आधार पर भुगतान होगा। 

अगर मांग पर पहल नहीं हुआ तो होगा तीन दिवसीय हड़ताल 

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा निदेशालय (डीएफएस) द्वारा अचानक से इस समझौते का उल्लंघन करते हुए सभी कर्मचारियों एवं स्केल-3 तक के अधिकारियों को मात्र 15 दिन का ही प्रोत्साहन राशि देने एवं उसके उपर स्केल-4 से उपर तक के अधिकारियों को 365 दिन का प्रोत्साहन राशि देने हेतु निर्देश जारी कर दिया गया। यूनियन्स के द्वारा आंदोलन की घोषणा के उपरांत केंद्रीय श्रमायुक्त ने सभी पक्षों को बुलाकर समझौता हेतु वार्ता प्रारंभ किया, जो 8 एवं 9 सितंबर 2026 को लगातार किया गया किन्तु भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा निदेशालय (डीएफएस) द्वारा पीएलआई भुगतान को तत्काल लंबित करने का ही आश्वासन दिया गया, किंतु 5 दिवसीय बैंकिंग की माँग पर कोई निर्णय नहीं दिया गया। सभी लंबित मामलों जिनमें ग्राहक सेवा में अपेक्षित सुधार हेतु सभी संवर्गों में नई बहाली करना भी शामिल है, पर सार्थक वार्ता नहीं करती है तो 28, 29, 30 सितंबर 2026 को तीन दिवसीय हड़ताल एवं इसके उपरांत भी यदि सार्थक समाधान नहीं निकलता है तो 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल किया जाएगा। प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में प्रमुख रूप से सिद्धेश नारायण दास, राघव कुमार सिंह, राजीव कुमार सिंह, कृष्ण मुरारी, मिथलेश कुमार, सुधीर कुमार, सुबोध रजक, राजेश ओझा, विभाष झा, पंकज कुमार, प्रदीप झा, राकेश मिश्रा, अवधेश प्रसाद, नीरज तिवारी, राजेश श्रीवास्तव, अरूण कुमार, कृष्णा तिवारी, बबलू कुमार, सरोज कुमार, अतुल दुबे, संतोष कुमार, राजकुमार प्रसाद, सोनू कुमार, उर्मिला कुमारी, आदि उपस्थित थे।

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